किसानो की मौत पर बोली लगाना बंद करो शिवराज!

खरी-खरी... महेन्द्र कन्नौज www.yuvaawaz.com

• लाश की बोली लगाते हो... कभी 5 लाख तो कभी 10 लाख और फिर 1 करोड़ के साथ राजनैतिक उपवास, कितना ढोंग करोगें..?

भोपाल । प्रदेश के किसान अपने हक और अधिकार की मांग को लेकर आंदोलन करते है । यही आंदोलन प्रदेश के मन्दसौर में उग्र हो जाता है बसे जलने लगती है, अफरा-तफरी मच जाती है । इसी बिच पुलिस की गोली से कुछ किसानो की मौत हो जाती है । फिर प्रदेश सरकार के मंत्री बेहूदा बयान देते है, उसके बाद घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए प्रदेश के मुखिया मन्दसौर में मृत किसानो के परिवार को 5-5 लाख रूपये आर्थिक मदद देने को घोषणा करते है, माहोल गर्माता है तो फिर 10-10 लाख रूपये देने की घोषणा होती है तभी विपक्षी राजनैतिक दल की इंट्री हो जाती है, पूरा प्रदेश आंदोलन की आग में जलने लगता है तो किसान पुत्र शिवराज द्वारा मन्दसौर घटना में मृत किसानो के परिवारो को 1-1 करोड़ रूपये और परिवार के 1 सदस्य को स्थाई सरकारी नोकरी देने की ताबड़तोड़ घोषणा की जाती है वही प्रदेश के मुखिया द्वारा किसान आंदोलन शांति की अपील हेतु टीवी और अख़बार में करोडो के विज्ञापन दिए जाते है । मामला फिर भी नही बनता तो फिर होती है राजनैतिक उपवास की नोटंकी शुरू... फिर क्या प्रशासन लग जाता है... शाही उपवास की तैयारी में जिसमें किसान पुत्र शिवराज सिंह चौहान का शाही उपवास के लिये 160 फिट लम्बे, 60 फिट चोडा वाटर फ्रुप पंडाल जिसमे 400 कुर्सियां, Z सेक्युरिटी, शाही स्टेज गद्दे तकियों से लैस, दर्जनों नए कूलर, पंडाल के पीछे दो आराम के लिये VIP कक्ष नए प्लास्टिक टॉयलेट के साथ... शिवराज के राजसी उपवास का एक दिन का खर्च करीब 2करोड़ 20लाख रूपये होता है । तब जाकर शिवराज के दावो के अनुसार किसान आंदोलन समाप्त होता है । तब सवाल यह उठता है की क्या शिवराज किसान आंदोलन से इतना डर गया था की उसे किसानो की लाश की बार-बार भाव बढ़ाकर बोली लगानी पड़ी... करोडो खर्च कर झूठा उपवास करना पड़ा । किसानो की मौत उनकी लाश पर रुपयो की बोली लगाना बंद करो शिवराज! ये वो अनमोल अन्नदाता है जिनका कर्ज चूका पाना तुम्हारे बस की बात नही है ।

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